सिवान के डॉ. बसंत नारायण सिंह का दिल्ली के राष्ट्रीय विज्ञान कॉन्क्लेव 2026 के लिए चयन

हेतिमपुर (गोरेयाकोठी) के डॉ. बसंत नारायण सिंह का चयन भारत मंडपम, नई दिल्ली में 27-29 अक्टूबर को होने वाले साइंस-टेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव 2026 के लिए हुआ।

SubhNews डेस्क25 October 20262 min read0 viewsसिवान
सिवान के डॉ. बसंत नारायण सिंह का दिल्ली के राष्ट्रीय विज्ञान कॉन्क्लेव 2026 के लिए चयन

सिवान जिले के गोरेयाकोठी प्रखंड के छोटे से गांव हेतिमपुर से निकले वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. बसंत नारायण सिंह को देश के बड़े विज्ञान सम्मेलन 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026' में भाग लेने के लिए चुना गया है। यह सम्मेलन 27 से 29 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होना है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों ने आधिकारिक सूचना भेजकर डॉ. सिंह को चयन की बधाई दी है।

गांव से विश्वविद्यालय तक का सफर

डॉ. बसंत नारायण सिंह इस समय राजस्थान के सीकर में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से उच्च शिक्षा और शोध तक पहुंचने की उनकी यात्रा को इलाके के लोग गर्व के साथ देख रहे हैं। चयन की खबर मिलते ही हेतिमपुर और आसपास के गांवों में खुशी का माहौल बन गया। जिले के शिक्षाविदों और शुभचिंतकों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

किन विषयों पर होगी चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजकों ने बताया है कि सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। तीन दिन के इस आयोजन का मकसद वैज्ञानिक शोध, तकनीकी विकास और नवाचार को गति देना है। इसमें विज्ञान और तकनीक के उभरते क्षेत्रों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष विज्ञान पर विचार-विमर्श होगा।

सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी, उद्योग प्रतिनिधि, स्टार्टअप उद्यमी और नीति-निर्माता शामिल हो सकते हैं। आयोजकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं की भागीदारी भी प्रस्तावित बताई गई है।

शोध और उद्योग को जोड़ने की कोशिश

इस कॉन्क्लेव का एक अहम लक्ष्य विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप के बीच तालमेल बढ़ाना है। यहां वैज्ञानिक अपने विचार साझा करेंगे और नई तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल की संभावनाओं पर बात होगी। ऐसे मंच पर सिवान के किसी शिक्षक-वैज्ञानिक की मौजूदगी जिले के लिए भी एक पहचान है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. सिंह की यह उपलब्धि दिखाती है कि गांव में पढ़ाई शुरू करने वाला विद्यार्थी भी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है। विज्ञान विषय पढ़ रहे जिले के छात्र-छात्राओं के लिए यह खबर हौसला बढ़ाने वाली है, खासकर उनके लिए जो शोध और अध्यापन को करियर के रूप में देख रहे हैं।

वनस्पति विज्ञान जैसे विषय में काम करने वाले शोधकर्ता खेती, पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े सवालों पर काम करते हैं, जो बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए खास मायने रखते हैं। उम्मीद की जा रही है कि सम्मेलन से लौटकर डॉ. सिंह के अनुभव क्षेत्र के विद्यार्थियों तक भी पहुंचेंगे।

स्रोत: दैनिक जागरण

फीचर्ड तस्वीर: Bharat Mandapam, New Delhi (venue of the conclave), photo by Ministry of Information and Broadcasting, GODL-India via Wikimedia Commons. स्रोत

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