दरौली के डुमरहर में 100 साल पुराना दंगल, यूपी-बिहार के पहलवानों ने दिखाए दांव

सिवान के दरौली प्रखंड के डुमरहर गांव में सौ साल से चली आ रही दंगल परंपरा में यूपी और बिहार के एक दर्जन से अधिक पहलवानों ने हिस्सा लिया।

SubhNews डेस्क25 October 20262 min read0 viewsसिवान
दरौली के डुमरहर में 100 साल पुराना दंगल, यूपी-बिहार के पहलवानों ने दिखाए दांव

सिवान जिले के दरौली प्रखंड का डुमरहर गांव एक बार फिर पारंपरिक कुश्ती का गवाह बना। शुक्रवार (23 अक्टूबर) को गांव में विशाल दंगल का आयोजन हुआ, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से पहलवान पहुंचे। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि यह दंगल 100 साल से भी ज्यादा समय से हर साल होता आ रहा है।

परंपरा को जिंदा रखने की कोशिश

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव-देहात में धीरे-धीरे गायब हो रहे पुराने खेलों में दंगल भी शामिल है। इसी परंपरा को जीवित रखने के लिए गांव के लोग मिलकर हर साल यह आयोजन करते हैं। इस बार दंगल की अध्यक्षता गुड्डू राय ने की। मंच संचालन मुखिया ललन राय ने किया, जबकि निर्णायक की जिम्मेदारी अमर राय ने संभाली।

दूर-दूर से आते हैं पहलवान

रिपोर्ट के अनुसार, इस दंगल में उत्तर प्रदेश के लार, मऊ, बलिया, दोहरीघाट, मइल और सलेमपुर जैसे इलाकों से पहलवान आते हैं। सिवान जिले के गुठनी, दरौली, मैरवा और नौतन तथा गोपालगंज के फुलवरिया और भोरे से भी पहलवान हिस्सा लेते हैं। आयोजकों के अनुसार, मध्य प्रदेश से भी पहलवान इस दंगल में आते रहे हैं। इस बार एक दर्जन से अधिक पहलवानों ने अखाड़े में अपना दमखम दिखाया।

सबसे रोमांचक मुकाबला

दिन का सबसे रोमांचक मुकाबला उत्तर प्रदेश के मइल के पहलवान राहुल यादव और कुशीनगर के पहलवान पंकज कुमार के बीच रहा। दोनों पहलवानों के दांव-पेच देखकर अखाड़े के चारों ओर जुटे दर्शक रोमांचित हो उठे। बीच-बीच में जयकारों से पूरा माहौल उत्साह से भर गया।

ग्रामीण खेलों की ताकत

दंगल केवल ताकत का खेल नहीं है, बल्कि इसमें अनुशासन, संतुलन और फुर्ती की भी परीक्षा होती है। गांव के अखाड़ों से निकलकर कई पहलवान राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। डुमरहर जैसे आयोजन ग्रामीण युवाओं को शारीरिक मेहनत और खेल से जोड़ते हैं और उन्हें अपने हुनर को दिखाने का मंच देते हैं।

सामूहिक भागीदारी

आयोजन में गांव और आसपास के कई लोग मौजूद रहे, जिनमें अमर सिंह, पप्पू राय, बबन भगत, रविंद्र राय, तेजनाथ यादव और प्रकाश राय आदि शामिल थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा इसी तरह जारी रखेंगे।

सिवान और आसपास के जिलों में कुश्ती की पुरानी परंपरा रही है। सौ साल पुराना यह दंगल बताता है कि गांव का समाज मिलकर अपनी सांस्कृतिक और खेल विरासत को संभाले रख सकता है।

स्रोत: हिंदुस्तान (लाइव हिंदुस्तान)

फीचर्ड तस्वीर: Representative photo: traditional kushti wrestling bout in Maharashtra, photo by Nikhilmore nimo, CC BY-SA 4.0 via Wikimedia Commons. स्रोत

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