बंजरिया का सेमरा मॉडल स्कूल बना मिसाल, गांव के बच्चे अब लैब में कर रहे प्रयोग
पूर्वी चंपारण के बंजरिया प्रखंड का सेमरा मॉडल स्कूल अत्याधुनिक प्रयोगशाला के साथ दूसरे स्कूलों के लिए प्रेरणा बना।

पूर्वी चंपारण के सुदूर ग्रामीण इलाके का एक सरकारी स्कूल अब दूसरे विद्यालयों के लिए प्रेरणा बन रहा है। बंजरिया प्रखंड के सेमरा स्थित श्री महावीर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (मॉडल स्कूल) में एक सुसज्जित और आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जहां गांव के छात्र-छात्राएं नियमित रूप से विज्ञान के प्रयोग कर रहे हैं। प्रभात खबर की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट में इस बदलाव को विस्तार से बताया गया है।
प्रखंडों में मॉडल स्कूल की पहल
बिहार सरकार ने राज्य के सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल स्थापित करने की पहल की है। रिपोर्ट के अनुसार, सेमरा का यह विद्यालय इस पहल के जमीन पर असर का अच्छा उदाहरण है। मॉडल स्कूल का दर्जा मिलने के बाद यहां पढ़ाई के स्तर के साथ स्कूल की दूसरी गतिविधियों में भी सुधार दिखा है।
किताब से प्रयोग तक
कभी ग्रामीण स्कूलों के बहुत से बच्चे प्रयोगशाला के नाम से भी अनजान होते थे। अब सेमरा में छात्र-छात्राएं लैब में बैठकर प्रयोग करते हैं और कठिन विषयों को व्यावहारिक तरीके से समझ रहे हैं। प्रयोग के जरिए पढ़ाई से बच्चों की रुचि बढ़ी है और उनकी सीखने की क्षमता में भी सुधार आया है।
प्रधानाध्यापक ने क्या कहा
विद्यालय के प्रधानाध्यापक नरेंद्र चौधरी ने बताया कि मॉडल स्कूल बनने के बाद बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हर क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं जुटाई गई हैं। उनके अनुसार, प्रयोग आधारित पढ़ाई से बच्चे उत्साहित हैं और शैक्षणिक के साथ-साथ सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
अभिभावक भी खुश
रिपोर्ट के मुताबिक, अभिभावकों और ग्रामीणों ने स्कूल में आए इस बदलाव की सराहना की है। उनका मानना है कि आधुनिक संसाधन मिलने से अब गांव के गरीब परिवारों के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
क्यों जरूरी है प्रयोगशाला
विज्ञान केवल रटने का विषय नहीं है। जब बच्चा खुद घोल बनाता है, सूक्ष्मदर्शी से कोशिका देखता है या सर्किट जोड़ता है, तो उसके मन में सवाल पूछने और जवाब खोजने की आदत बनती है। यही आदत आगे चलकर इंजीनियरिंग, मेडिकल, कृषि विज्ञान और शोध जैसे क्षेत्रों का रास्ता खोलती है। ग्रामीण इलाके में ऐसी सुविधा मिलना बच्चों, खासकर बेटियों के लिए बड़ा अवसर है।
सेमरा का अनुभव दिखाता है कि सही संसाधन और अच्छा माहौल मिले तो गांव के बच्चे भी शिक्षा में ऊंचाइयां छू सकते हैं। सुभन्यूज ऐसे और विद्यालयों की कहानियां पाठकों तक पहुंचाता रहेगा। अगर आपके इलाके के किसी सरकारी स्कूल में भी ऐसा बदलाव हुआ है, तो हमें जरूर बताएं।
स्रोत: प्रभात खबर
फीचर्ड तस्वीर: पूर्वी चंपारण के रक्सौल स्थित फूलचंद साह मिडिल स्कूल (प्रतीकात्मक, सेमरा स्कूल की तस्वीर नहीं)। फोटो: Del4356b, Wikimedia Commons, CC0. स्रोत