सेना से रिटायर होकर किसान बने राजेश यादव, 10 कट्ठे में बोड़ी से रोज करीब 5 हजार की कमाई

पीपराकोठी के पूर्व सैनिक राजेश कुमार यादव 10 कट्ठे में बोड़ी, पपीता, गन्ना, मछली पालन व वर्मी कम्पोस्ट से कर रहे अच्छी कमाई।

SubhNews डेस्क25 October 20262 min read0 viewsमोतिहारी
सेना से रिटायर होकर किसान बने राजेश यादव, 10 कट्ठे में बोड़ी से रोज करीब 5 हजार की कमाई

देश की सरहद पर सेवा देने के बाद पूर्वी चंपारण के एक पूर्व सैनिक अब खेतों में मिसाल पेश कर रहे हैं। पीपराकोठी प्रखंड के पड़ोलिया गांव के राजेश कुमार यादव ने सेना से सेवानिवृत्ति के बाद आराम चुनने के बजाय खेती को अपनी नई पहचान बनाया। प्रभात खबर की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, वे कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पीपराकोठी के मार्गदर्शन में आधुनिक और जैविक तरीकों से खेती कर रहे हैं।

पपीते से शुरुआत, फिर कई फसलें

राजेश यादव ने खेती की शुरुआत पपीते से की। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपने खेतों में कद्दू, बोड़ी (बरबट्टी), गन्ना और गेंदा फूल की खेती भी जोड़ी। खेती के साथ वे मछली पालन और वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) का उत्पादन भी करते हैं। एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने समेकित (इंटीग्रेटेड) खेती का मॉडल अपनाया है, जिससे आमदनी के कई रास्ते खुल गए हैं।

10 कट्ठे में बोड़ी, 45 दिन में उपज

उनकी सबसे लाभकारी फसल बोड़ी साबित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दस कट्ठा जमीन में बोड़ी लगाई और करीब 45 दिनों में ही फलियां तोड़ने लायक हो गईं। उनके अनुसार, बोड़ी की बिक्री से उन्हें रोज लगभग पांच हजार रुपये की आमदनी हो रही है। कम समय में तैयार होने वाली और रोज बिकने वाली सब्जी छोटे किसानों के लिए नियमित नकद आय का अच्छा जरिया बन सकती है।

जैविक तरीका और अपनी खाद

राजेश यादव जैविक तकनीकों पर जोर देते हैं और खुद वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं। अपनी खाद बनाने से रासायनिक खाद पर खर्च घटता है और मिट्टी की सेहत भी बेहतर होती है। मछली पालन से उन्हें खेती के अलावा एक अलग आमदनी भी मिलती है।

केवीके का मार्गदर्शन बना सहारा

उनकी सफलता में कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी की तकनीकी सलाह की अहम भूमिका रही है। केवीके किसानों को बीज, फसल चक्र, कीट प्रबंधन और नई तकनीकों के बारे में जानकारी देता है। जो किसान अपनी खेती में बदलाव करना चाहते हैं, वे अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

युवाओं और पूर्व सैनिकों के लिए संदेश

राजेश यादव की कहानी बताती है कि अनुशासन, मेहनत और सही जानकारी हो तो खेती भी सम्मानजनक और लाभकारी पेशा बन सकती है। गांव में रहकर रोजगार खोज रहे युवाओं और सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए यह एक व्यावहारिक रास्ता है। समेकित खेती में एक फसल कमजोर पड़े तो दूसरी आमदनी संभाल लेती है, और जोखिम भी बंट जाता है।

स्रोत: प्रभात खबर

फीचर्ड तस्वीर: बोड़ी (बरबट्टी/यार्डलॉन्ग बीन) का पौधा (प्रतीकात्मक, किसान के खेत की तस्वीर नहीं)। फोटो: Shijan Kaakkara, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. स्रोत

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