थावे भवानी मंदिर में नौका विहार शुरू, आस्था के साथ इको-टूरिज्म को बढ़ावा
गोपालगंज के थावे भवानी मंदिर परिसर के पास जलाशय में नौका विहार शुरू हुआ। जंगल से घिरे मंदिर में इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बल।

गोपालगंज का प्रसिद्ध थावे भवानी मंदिर अब आस्था के साथ-साथ प्रकृति पर्यटन का भी केंद्र बनता जा रहा है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस शारदीय नवरात्र में मंदिर परिसर के पास बने जलाशय में श्रद्धालुओं के लिए नौका विहार (बोटिंग) की विशेष व्यवस्था की गई है। इस नई सुविधा से 50 से अधिक स्थानीय युवाओं को सीधे रोजगार मिला है।
शहर से छह किलोमीटर, जंगल के बीच मंदिर
थावे मंदिर गोपालगंज शहर से करीब छह किलोमीटर दूर सिवान-गोपालगंज मुख्य मार्ग पर स्थित है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल है, जहां ऊंचे पेड़ों की छांव और पक्षियों की आवाजें श्रद्धालुओं को शहर की भागदौड़ से अलग अनुभव देती हैं। नवरात्र के दिनों में यहां बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
लोककथा से जुड़ा इतिहास
मंदिर से जुड़ी लोक मान्यता के अनुसार, यह कथा चेरो वंश के राजा मनन सेन के समय की है। उस दौर में मां दुर्गा के भक्त रहषु स्वामी इसी जंगल में रहते थे। मान्यता है कि भक्त की पुकार पर देवी कामरूप-कामाख्या से चलकर थावे आईं।
नौका विहार बना नया आकर्षण
रिपोर्ट के अनुसार, सुबह की आरती के बाद या शाम के समय पेड़ों की छाया के बीच जलाशय में नाव की सैर श्रद्धालुओं को खूब भा रही है। परिवार के साथ आने वाले लोगों, खासकर बच्चों के लिए यह दर्शन के साथ घूमने का एक अच्छा विकल्प बन गया है। जंगल और जलाशय का यह मेल थावे को इको-टूरिज्म के लिहाज से खास बनाता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा
थावे मंदिर गोपालगंज की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभाता है। स्थानीय व्यापारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि नवरात्र के नौ दिनों में यहां 500 से अधिक दुकानों के जरिये प्रसिद्ध 'पिड़िकिया' प्रसाद, नारियल और चुनरी का करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। अब नौका विहार ने युवाओं के लिए कमाई का एक नया रास्ता खोला है।
पर्यटन की बढ़ती संभावना
धार्मिक स्थल के साथ प्राकृतिक सुंदरता जुड़ जाए तो पर्यटक ज्यादा समय रुकते हैं और आसपास के कारोबार को फायदा होता है। थावे में शुरू हुई यह पहल दिखाती है कि छोटी-छोटी सुविधाएं भी किसी स्थान की पहचान और स्थानीय रोजगार दोनों को बढ़ा सकती हैं। नवरात्र के बाद भी सालभर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह जगह और आकर्षक बन रही है।
स्रोत: दैनिक जागरण
फीचर्ड तस्वीर: Pond with fountain at Thawe Mandir, Gopalganj, photo by Manjeetchaurasia, CC BY-SA 4.0 via Wikimedia Commons. स्रोत