गोपालगंज के सर्वेश तिवारी को 'पुण्यपथ' के लिए इफको युवा साहित्य सम्मान-2026
कुचायकोट के करवतही गांव के सर्वेश तिवारी को उपन्यास 'पुण्यपथ' के लिए इफको युवा साहित्य सम्मान-2026 मिलेगा। घोषणा नई दिल्ली में हुई।

गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड के साहित्यकार सर्वेश तिवारी को उनके उपन्यास 'पुण्यपथ' के लिए इफको युवा साहित्य सम्मान-2026 देने की घोषणा हुई है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस सम्मान की घोषणा शुक्रवार (23 अक्टूबर) को नई दिल्ली में की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार के किसी साहित्यकार को यह सम्मान पहली बार मिल रहा है, जिससे जिले के साहित्य जगत में खुशी की लहर है।
निर्णायक समिति ने किया चयन
रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ साहित्यकार श्रीभगवान सिंह की अध्यक्षता वाली निर्णायक समिति ने बैठक के बाद सम्मान की घोषणा की। भारत सरकार के उपक्रम इफको की ओर से 2024 से यह साहित्य सम्मान दिया जा रहा है। इस घोषणा के साथ कुचायकोट का करवतही गांव भी साहित्यिक हलकों में चर्चा में आ गया है।
'पुण्यपथ' और दूसरी रचनाएं
सर्वेश तिवारी का उपन्यास 'पुण्यपथ' 2021 में प्रकाशित हुआ था और 2021 तथा 2022 में बेस्टसेलर के रूप में पहचान बना चुका है। उनकी रचनाओं में भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े विषय प्रमुखता से दिखते हैं। 'पुण्यपथ' के अलावा उनकी 'परत' और 'पूर्णाहुति' जैसी किताबें भी पाठकों के बीच चर्चित रही हैं।
शिक्षक भी, लेखक भी
करवतही गांव के रहने वाले सर्वेश तिवारी अहियापुर के एक प्राथमिक विद्यालय में विशिष्ट शिक्षक हैं। बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने लेखन को भी लगातार जारी रखा। यही वजह है कि उनका सम्मान स्थानीय शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी गर्व का विषय बना है। यह बताता है कि गांव के स्कूल में पढ़ाते हुए भी राष्ट्रीय स्तर की रचना संभव है।
गांव में साहित्य का उत्सव
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेश तिवारी की अगुवाई में हर साल करवतही बाजार में 'सदानीरा महोत्सव' आयोजित किया जाता है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से साहित्यकार और साहित्यप्रेमी आते हैं। इस आयोजन ने इलाके में साहित्यिक माहौल बनाने और स्थानीय लोगों को किताबों व लेखकों से जोड़ने में भूमिका निभाई है।
लेखक की प्रतिक्रिया
दैनिक जागरण से बातचीत में सर्वेश तिवारी ने इस सम्मान को अपनी साहित्यिक मेहनत की स्वीकृति बताया और कहा कि इससे उनका उत्साह बढ़ा है। उन्होंने शुभचिंतकों, साहित्यकार मित्रों और अभिभावकों का आभार जताया।
गोपालगंज के युवा पाठकों और लिखने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह खबर एक संदेश है कि अपनी भाषा और अपनी मिट्टी की कहानियां भी देशभर में पहचान पा सकती हैं।
स्रोत: दैनिक जागरण
फीचर्ड तस्वीर: Representative photo: Hindi books section of the Goa State Central Library, photo by Arati Shivaji Gawas, CC BY-SA 4.0 via Wikimedia Commons. स्रोत