कायाकल्प योजना: गोपालगंज के 1915 स्कूलों में 30 नवंबर तक रंग-रोगन और मरम्मत
गोपालगंज में कायाकल्प योजना के तहत सभी 1915 विद्यालयों में रंग-रोगन और मरम्मत 30 नवंबर तक पूरी होगी। आंगनबाड़ी और अस्पताल भवन भी शामिल।

गोपालगंज जिले के सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक भवनों की सूरत बदलने की तैयारी है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, कायाकल्प योजना की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी समीर सौरभ की मौजूदगी में निर्देश दिया गया कि जिले के सभी 1915 विद्यालयों में रंग-रोगन और छोटी-मोटी मरम्मत का काम 30 नवंबर तक पूरा कर लिया जाए।
सभी स्कूलों को मिल चुकी है राशि
यह समीक्षा बैठक शनिवार (24 अक्टूबर) को हुई, जिसमें जिला स्तर के अधिकारी शामिल हुए और प्रखंड स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। अधिकारियों ने बताया कि सभी विद्यालयों को इस काम के लिए शिक्षा विभाग की ओर से राशि उपलब्ध करा दी गई है। समीक्षा में पता चला कि पोर्टल पर 190 विद्यालयों की प्रविष्टि अभी बाकी है, जिसे तुरंत पूरा करने को कहा गया।
आंगनबाड़ी और अस्पताल भी शामिल
कायाकल्प योजना केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 1178 आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मॉडल अस्पताल, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, पंचायत सरकार भवन, सामुदायिक भवन और अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के भवनों में भी तय समय के भीतर रंग-रोगन और मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गुणवत्ता से समझौता नहीं
जिलाधिकारी ने लंबित योजनाओं की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति पोर्टल पर तुरंत देने को कहा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि काम की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। सभी संबंधित अधिकारियों को रोज प्रगति की समीक्षा कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
बच्चों के लिए क्यों अहम
साफ-सुथरी दीवारें, ठीक दरवाजे-खिड़कियां और मरम्मत किए गए कमरे बच्चों के लिए पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाते हैं। अच्छे दिखने वाले स्कूल भवन बच्चों और अभिभावकों दोनों का भरोसा बढ़ाते हैं और उपस्थिति पर भी सकारात्मक असर डालते हैं। इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सेवाएं मिलती हैं, इसलिए वहां का साफ और सुरक्षित भवन होना जरूरी है।
अभिभावक और समुदाय की भूमिका
स्कूल प्रबंधन समितियां और अभिभावक अपने गांव के स्कूल में हो रहे काम पर नजर रख सकते हैं और कोई कमी दिखे तो विद्यालय प्रधान या प्रखंड शिक्षा कार्यालय को बता सकते हैं। सामुदायिक भागीदारी से यह सुनिश्चित होगा कि कायाकल्प का फायदा सही मायनों में बच्चों तक पहुंचे।
तय समय-सीमा तक काम पूरा हुआ तो नए साल से पहले जिले के करीब दो हजार स्कूल और एक हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र नए रूप में नजर आ सकते हैं।
स्रोत: हिंदुस्तान (लाइव हिंदुस्तान)
फीचर्ड तस्वीर: Representative photo: a school building in Danapur Cantonment, Bihar, photo by Avicool1993, CC BY-SA 3.0 via Wikimedia Commons. स्रोत