सुपौल की प्रिया कुमारी को राष्ट्रीय पुरस्कार, 'दरी वाला स्कूल बैग' बना खास
सुपौल की नौवीं की छात्रा प्रिया कुमारी को 'कारपेट विद स्कूल बैग' के लिए इंस्पायर मानक की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुरस्कार मिला। अब वे जापान जाएंगी।

बिहार के सुपौल जिले की एक सरकारी स्कूल की छात्रा ने अपने छोटे-से आविष्कार से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। किशनपुर प्रखंड के फुलकहा गांव की प्रिया कुमारी को 12वीं राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता (एनएलईपीसी, इंस्पायर-मानक) में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस चयन के बाद अब उन्हें जापान जाकर विज्ञान और तकनीक को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
बैग भी, बैठने की दरी भी
प्रिया उच्च माध्यमिक विद्यालय, फुलकहा में नौवीं कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने अपने शिक्षक महेश्वरी प्रसाद के मार्गदर्शन में 'कारपेट विद स्कूल बैग' नाम का एक खास बैग बनाया है। इस बैग के साथ एक दरी जुड़ी है, जिसे जरूरत पड़ने पर खोलकर जमीन पर बिछाया जा सकता है और पढ़ाई के बाद मोड़कर फिर बैग में रखा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बैग वॉटरप्रूफ भी है।
रोजमर्रा की समस्या से निकला समाधान
गांवों के कई सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क की कमी के कारण बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ता है। प्रिया ने इसी आम परेशानी को ध्यान में रखकर यह विचार विकसित किया। निर्णायकों ने उनके प्रोजेक्ट को बच्चों की वास्तविक जरूरत से जुड़ा उपयोगी नवाचार माना।
भारत मंडपम में देशभर के बाल वैज्ञानिक
यह प्रतियोगिता 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई। इसका आयोजन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-इंडिया के तत्वावधान में किया गया। देशभर से आए बाल वैज्ञानिकों में से 62 को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जिनमें बिहार की प्रिया कुमारी भी शामिल रहीं।
शिक्षक परिवार से आती हैं प्रिया
प्रिया के पिता शिवशंकर मंडल सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और उनकी मां संजीता कुमारी भी शिक्षिका हैं। घर में पढ़ाई का माहौल और स्कूल में शिक्षक का मार्गदर्शन, दोनों ने मिलकर इस विचार को एक कामकाजी मॉडल तक पहुंचाया।
इंस्पायर-मानक क्या है
इंस्पायर-मानक योजना स्कूली विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं के समाधान के लिए नए विचार सोचने और उन्हें मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। जिला और राज्य स्तर से चुने गए प्रोजेक्ट राष्ट्रीय प्रदर्शनी तक पहुंचते हैं।
एक गांव के सरकारी स्कूल की छात्रा की यह उपलब्धि बताती है कि अच्छे विचार के लिए बड़े संसाधन नहीं, बल्कि आसपास की समस्याओं को गौर से देखने की नजर चाहिए।
स्रोत: प्रभात खबर
फीचर्ड तस्वीर: भारत मंडपम, नई दिल्ली (प्रतियोगिता स्थल) | फोटो: Ministry of Information and Broadcasting / Wikimedia Commons (GODL-India). स्रोत