पूर्णिया का मखाना पहुंचा ग्रीस, 'मन की बात' में प्रधानमंत्री ने किया जिक्र

पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन मखाने की पहली खेप एपीडा के सहयोग से ग्रीस भेजी गई। 25 अक्टूबर को मन की बात में प्रधानमंत्री ने इसे किसानों के लिए नया बाजार बताया।

SubhNews डेस्क25 October 20262 min read0 viewsबिहार
पूर्णिया का मखाना पहुंचा ग्रीस, 'मन की बात' में प्रधानमंत्री ने किया जिक्र

बिहार के पूर्णिया जिले का मखाना अब यूरोप के बाजार तक पहुंच गया है। पूर्णिया से एक मीट्रिक टन फूल मखाने की पहली व्यावसायिक खेप ग्रीस भेजी गई है। रविवार, 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इसका उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में तैयार उत्पाद अब विदेशी बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं। प्रभात खबर की रिपोर्टों के अनुसार, इस निर्यात में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने अहम सहयोग दिया।

मन की बात में बिहार का उदाहरण

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में पूर्णिया के मखाने के ग्रीस पहुंचने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के मालदीव पहुंचने को भारतीय किसानों के लिए खुलते नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के उदाहरण के रूप में रखा। उन्होंने कहा कि त्योहारों में लोग स्वदेशी सामान को ज्यादा महत्व दे रहे हैं और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना भारतीय उत्पादों को दुनिया तक ले जाने में भी मदद कर रही है।

एपीडा के सहयोग से बना रास्ता

रिपोर्ट के अनुसार, एपीडा ने स्थानीय किसानों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात की प्रक्रिया से जोड़ा। इसी तैयारी के बाद अक्टूबर की शुरुआत में ग्रीस के लिए एक मीट्रिक टन मखाने से भरा कंटेनर रवाना हुआ।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि के लिए पूर्णिया और बिहार के मखाना उत्पादकों को बधाई दी। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने भी इसे राज्य के किसानों के लिए गर्व का क्षण बताया।

किसानों को क्या फायदा

मखाना उत्पादक लंबे समय से अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय व्यापारियों और बिचौलियों पर निर्भर रहे हैं, जिससे उन्हें उपज का पूरा दाम नहीं मिल पाता था। विदेशी बाजार से सीधा जुड़ाव होने पर छोटे और मध्यम किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

मिथिला मखाना को पहले ही भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल चुका है, और देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। ऐसे में यूरोप तक सीधा निर्यात राज्य के इस पारंपरिक उत्पाद की ब्रांड पहचान मजबूत कर सकता है।

आगे की योजना

रिपोर्ट के मुताबिक, एपीडा और जिला प्रशासन मिलकर आने वाले समय में पूर्णिया से अन्य यूरोपीय देशों और अमेरिका तक बड़ी खेप भेजने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और ग्रेडिंग इकाइयों को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मखाना अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरे।

ग्रीस भेजी गई यह खेप भले ही आकार में छोटी हो, लेकिन सीमांचल के किसानों के लिए यह वैश्विक बाजार का दरवाजा खुलने जैसा है।

स्रोत: प्रभात खबर

फीचर्ड तस्वीर: प्रतीकात्मक: भुना हुआ मखाना | फोटो: FacetsOfNonStickPans / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0). स्रोत

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