मिशन कायाकल्प: पश्चिम चंपारण के 2500 स्कूलों में 31 अक्टूबर तक पूरे होंगे सुविधा के काम
पश्चिम चंपारण के 2500 स्कूलों में मिशन कायाकल्प के तहत मरम्मत, रंग-रोगन, फर्श व पेयजल के काम 31 अक्टूबर तक पूरे करने का निर्देश।

पश्चिम चंपारण के सरकारी स्कूलों की सूरत जल्द बदली हुई दिख सकती है। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने शनिवार, 24 अक्टूबर को समाहरणालय सभागार में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि मिशन कायाकल्प के तहत जिले के 2500 विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के सभी काम 31 अक्टूबर तक पूरे कर लिए जाएं। प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, इन कामों में भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन, फर्श और पेयजल जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र भी जुड़ेंगे स्कूलों से
बैठक में डीएम ने कहा कि जिन प्राथमिक विद्यालयों में पर्याप्त कमरे और जरूरी सुविधाएं हैं, उनसे आंगनबाड़ी केंद्रों को जोड़ा जाए। इससे छोटे बच्चों को बेहतर भवन और माहौल मिल सकेगा, और आगे चलकर उनका स्कूल में दाखिला भी सहज होगा। जिन विद्यालयों के पास अतिरिक्त जमीन है, उन्हें चिह्नित कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
भूमिहीन स्कूलों के लिए जमीन की तलाश
जिन विद्यालयों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए जनप्रतिनिधियों और अंचलाधिकारियों के तालमेल से जमीन खोजने का निर्देश दिया गया। अपना भवन मिलने से ऐसे स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था स्थायी और बेहतर हो सकेगी।
तस्वीरों से होगी काम की निगरानी
डीएम ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से कहा कि वे विद्यालयों में चल रहे कामों की नियमित निगरानी करें और प्रगति की तस्वीरें तय समूह में साझा करें। इससे काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों पर नजर रखी जा सकेगी।
पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी जोर
बैठक केवल भवनों तक सीमित नहीं रही। जिलाधिकारी ने स्कूलों के नियमित निरीक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के अभिलेखों का एचआरएमएस/सीएफएमएस और ई-शिक्षा कोष पोर्टल से सत्यापन जल्द पूरा कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया।
स्कूलों को मिलेगी एक जैसी पहचान
इसी दिन जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जारी एक अलग निर्देश के अनुसार, जिले के सरकारी स्कूलों की रंगाई अब विभाग द्वारा तय रंगों में होगी। प्रभात खबर के मुताबिक, कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों का बाहरी हिस्सा गुलाबी और बॉर्डर मैरून होगा, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों में बाहर ग्रे और बॉर्डर पर नीला रंग रहेगा। कमरों के भीतर सफेद रंग होगा। स्कूल भवन पर कम से कम एक फीट ऊंचे अक्षरों में विद्यालय का नाम और उसके नीचे यू-डायस कोड लिखना भी जरूरी होगा।
साफ-सुथरे कमरे, पीने का पानी और अच्छी फर्श जैसी बुनियादी चीजें बच्चों की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। अभिभावकों के लिए भी यह भरोसे की बात है कि उनके बच्चों के स्कूल बेहतर हो रहे हैं।
स्रोत: प्रभात खबर
फीचर्ड तस्वीर: बेतिया राज परिसर का घंटाघर, बेतिया शहर (फाइल फोटो, खबर से जुड़ी तस्वीर नहीं)। फोटो: Bettiah, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. स्रोत